अनुशासन और धीरज से बनाएं Long Term Wealth - Money Sanchay

अनुशासन और धीरज से बनाएं Long Term Wealth

अनुशासन और धीरज से बनाएं लॉन्ग टर्म वेल्थ

Nivesh ke 5 nayab tareeke

बाजार में गहमागहमी बढ़ने पर निवेशकों को फैसले लेने में हिचक होती है। चंद कामयाब IPO, कुछ दिन इंडेक्स की High Closing  और कुछ अप्रत्याशित Marge  या Takeover  बाजार में हलचल करते हैं। निवेशकों को लगने लगता है कि बहुत सावधानी बरतने अगला Bull Run miss कर जाएं। कुछ को डर लगता है कि कहीं गलत चयन न हो गया , जिससे बाद में पछताना पड़े। ऐसे में सामान्य निवेशकों को क्या करना चाहिए?
पहली बात यह है कि Equity Market में फटाफट कमाई के टिप्स देने वाले शख्स  Financial Adviser नहीं होते हैं। वे कभी निवेशकों का हित नहीं देखते, जो निवेशक के हालात के हिसाब से उनके लिए प्लान नहीं बनाते, वे एडवाइजर नहीं होते, वे ऑपरेटर्स एक खास आर्थिक मकसद पूरा करते हैं। ये जिन शेयरों को ट्रैक करते हैं, उनके बारे में खबरें और अपडेट फैलाने का काम करते हैं और उनकी Fake Analysis  में योगदान करते हैं। ऐसे में आपको देखना होगा कि टीवी, प्रिंट मीडिया, ऑनलाइन मीडिया पर शेयरों की खरीद-फरोख्त की एकतरफा सलाह के शोरगुल में आप फंस न जाएं। ये पेशेवर सलाहकार नहीं होतीं और इनके हिसाब से निवेश के फैसले लेना रिस्की होता है।

दूसरी बात यह है कि सार्वजनिक चर्चा में हो सकता है कि कंपनी से जुड़ी अहम जानकारियां गायब या गलत हों। IPO के Order Document को कोई नहीं पढ़ता और न ही Analyse करता है। कंपनियां अपना विज्ञापन इस तरह करती हैं कि पब्लिक के बीच उनका चेहरा आम हो जाए और पब्लिक उनमें दिलचस्पी ले। तात्कालिक घटनाएं IPO की मेरिट पर चर्चा को प्रभावित करती हैं। अगर कोई IPO खासा कामयाब रहता है तो उसमें अलॉटमेंट पाने में नाकाम निवेशकों की नजरें अगले इश्यू पर टिक जाती हैं। जब कुछ IPO प्रीमियम पर लिस्ट होते हैं, लोग मौका छोड़ना नहीं चाहते। ऐसे में लोगों को नफा-नुकसान पर ध्यान देते हुए बैलेंस्ड सोच से काम करना चाहिए।

तीसरी बात यह है कि निवेशकों की दिलचस्पी जगने पर कुछ salers हरकत में आ जाते हैं। बाजार में financial product की भरमार को मानना चाहिए कि यह बाजार की चाल है, जिसमें प्रोड्यूसर्स फैशन के हिसाब से प्रॉडक्ट तैयार करते हैं, ज्यादा लोगों तक पहुंचने और ज्यादा फंड जुटाने को सेलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए target और incentive तय करते हैं। निवेशकों को समझना चाहिए कि sales बढ़ाने पर ध्यान  रखने वाले ये लोग हमेशा अपना और सिर्फ अपना फायदा देखते हैं, अगर वे यह नहीं बता पाएं कि उससे निवेशक की जरूरतें किस तरह पूरी होंगे, तो खरीदारी के बारे में सोचने का कोई फायदा नहीं।


चौथी और जरूरी बात यह है कि निवेश संबंधी फैसलों का उद्देश्य निवेशक के भविष्य को सुरक्षित बनाना होता है। ऐसे में निवेश का सबसे अच्छा वक्त तब होना चाहिए जब आपके पास सरप्लस हो और जब पैसों की जरूरत हो, redemption का सही वक्त होता है। Future products बताने के लिए शेयर, इंडेक्स या फंड का पुराना प्रदर्शन दिखाना आसान होता है। इसी तरह Profit Booking को जरूरी रणनीति बताकर निवेशकों की भावना और निवेश योजना से खिलवाड़ करना आसान होता है।

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पांचवीं बात यह है कि इस पर हमेशा चर्चा होती है कि क्या खरीदना चाहिए। एक शोध में ये बात सामने आई है की निवेशक दूसरे की लिस्ट के हिसाब से खरीदारी करने में सहज महसूस करते हैं। लेकिन इन सलाहों में दिक्कत यह है कि कहीं नहीं बताया जाता कि किस तारीख तक बेच देना चाहिए और कौन सा उनका निवेश  गलत साबित हुआ है। लिस्ट की समीक्षा होती रहती है और नाम बदलते रहते हैं। ऐसे में पहले की सलाह पर खरीदारी करने वाले ठगा सा महसूस करते हैं।
जो निवेशक लॉन्ग टर्म वेल्थ चाहते हैं, उनको शेयर या फंड के चुनाव में मेरिट और अपनी सहूलियत पर ध्यान देना चाहिए। इसके लिए Market Timming की जरूरत नहीं। अनुशासन और धीरज काफी होगा।

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