Know 5 main rules of Bank FD (बैंक FD के पांच नियम ) - Money Sanchay

Know 5 main rules of Bank FD (बैंक FD के पांच नियम )

 क्या आप बैंक FD के पांच नियम जानते हैं आप…

   

हम जब भी Income Tax Return भरते हैं तो Bank FD के बारे में नहीं सोचते हैं, लेकिन FD पर मिलाने वाले ब्याज का रिटर्न से सीधा सम्बन्ध है | क्या आप बैंक में सविधि जमा खाता यानी Fixed Deposit Account (FD Account)  खोलने जा रहे हैं? भारतीय निवेशकों के बीच प्रचलित इस निवेश विकल्प के बारे में आपको बता दें कि इससे जुड़ कुछ नियम ऐसे भी हैं जो कि शायद आपको न पता हों। ये बहुत महत्वपूर्ण नियम हैं,  खास तौर से ऐसी स्थिति में जब आप ब्याज से हुई आय की कर संबंधी योग्यता जानना चाहते हों। आइए जानें शुरू करते हैं  :

1- यदि आपने अपने Bank FD पर किसी एक वित्तीय वर्ष में ब्याज के रूप में 10 हजार रुपए से ज्यादा कमाया  है तो उस पर 10 फीसदी के हिसाब से TDS कटेगा। उस पर भी यदि आपने पैन (परमानेंट अकाउंट नंबर)  नहीं दिया हुआ है, तो 20 फीसदी की दर से टैक्स काटा जा सकता है।
2-लेकिन, यहां आपको बता दें कि यदि किसी एक बैंक की एक या उससे अधिक शाखाओं में खोले गए रिकरिंग डिपॉजिट (आवर्ती जमा खाता) या एफडी से होने वाली सकल आय किसी एक वित्तीय वर्ष में 10 हजार के पार है तो उस पर टीडीएस कटेगा
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3- यदि बैंक ने आपके FD पर टीडीएस काट लिया हो तो भी आपको अपनी Income Tax Return के दौरान इसका जिक्र करना होगा। यदि बैंक ने टीडीएस नहीं काटा है तो भी ITR File करते समय आपको इसे अपनी इनकम में शामिल मानते हुए इसका जिक्र करना होगा। ब्याज से आय (Interest Income) पर टैक्स इस बात से निर्धारित होता है कि आप किस टैक्स स्लैब में आते हैं। वैसे तो बैंक 10 फीसदी की दर से टीडीएस काटते हैं लेकिन यदि आप ऊंचे टैक्स ब्रैकेट में आते हैं तो आपको रिटर्न फाइल करते समय अधिक टैक्स देना होगा।


4- यदि आपकी कर योग्य आय कर छूट के दायरे में आती है यानी सालाना 3 लाख रुपए से कम है और आपका वर्ष विशेष के लिए इनकम टैक्स शून्य बनता है तो आप ब्याज से हुई आय पर से टीडीएस बचा सकते हैं। लेकिन इसके लिए समय से फॉर्म 15G या 15H जमा करवाना होगा। अगर आप किसी कारण से ये फॉर्म नहीं दे पाए हैं तो आपको इस रकम की वापसी के लिए रिफंड भरना होगा।
5- राहत की बात यह है कि बचत खाते (सेविंग अकाउंट) के मामले में हुई इंट्रेस्ट इनकम पर कोई टीडीएस नहीं कटता। हालांकि एक साल में यदि ब्याज से होने वाली कुल आय 10 हजार रुपए से अधिक बन जाती है तो इस पर टैक्स देना होगा।

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