What is Share Capital (Share Market Tutorial) - Money Sanchay

What is Share Capital (Share Market Tutorial)

What is Share Capital

शेयर पूंजी किसे कहते हैं ?

 

पिछले लेखा में मैंने आपको शेयर क्या होता है के बारे में बताया था जिसमे मैंने आपको शेयर और उसके प्रकार के बारे में बताया था | अगर आप शेयर मार्किट में लेन-देन करना चाहते हैं तो आपको उस सभी तथ्यों को जानना बहुत जरुरी है जो इससे जुड़े हुए हैं | इसी क्रम में मैं किसी कंपनी के बनावट को समझाने के लिए आज शेयर पूंजी (Share Capital) के बारे में बताने जा रहा हूँ |

  हम जानतें हैं कि कोई भी व्यक्ति कितनी मेहनत से पैसा कमाता है, तो उसको कहीं भी निवेश करने से पहले उसे उस संस्था के बारे में सभी बातें बहुत बारीकी से जन लेनी चाहिए, और उसके बारे में जानने के लिए उसके बनावट के बारे में जानना बहुत जरुरी है |
चलिए आज हम एक कंपनी पूंजी  के बनावट के बारे में जानेंगे :

पूँजी (capital) :

  पूँजी से आशय उस राशि से है जिसका प्रयोग किसी भी संस्था  की चल अथवा अचल संपत्ति को क्रय करने के लिए किया जाता है, पूंजी का प्रयोग कंपनी के संचालन में भी किया जाता है | पूँजी किसी भी व्यवसाय की मेरुदण्ड होती है| पूँजी के बिना किसी कम्पनी का व्यापर आरम्भ नही किया जा सकता है |
एक कंपनी मेंएक से ज्यादा सदस्य होते हैं इसी लिए इसकी  पूंजी  का उल्लेख  कम्पनी के पार्षद सीमा नियम होता  है |


कंपनी की पूंजी :

अंश पूँजी (Share Capital ) –  पूँजी के छोटे- छोटे भाग को हम अंश कहते हैं  कम्पनी  पूँजी एकत्रित करने के लिए अपनी पूँजी को कई  हिस्सों में बाँट देती है इसके प्रतेक  हिस्से को अंश कहा जाता है |
कम्पनी अधिनियम की धरा 2(४६) के अनुसार “ अंश का आशय कम्पनी की पूँजी के न्यूनतम हिस्से से होता है                                                    

अंश पूँजी के प्रकार Kinds of Share Capital

अधिकृत पूँजी (Authorized Capital)  –  

कम्पनी के स्थापना के समय वर्तमान व भविष्य दोनों की आवश्यकता को ध्यान में रख कर जिस पूँजी से कम्पनी की रजिस्ट्री की जाती है उसे अधिकृत पूँजी (Authorized Capital) कहते हैं | पार्षद सीमानियम में उसका उल्लेख किया जाता है | कंपनी वर्तमान में या भविष्य में इससे अधिक अंशों का निर्गमन नहीं कर सकती है |

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What is Share and How it relate to Share Market (Tutorials For share Market)

निर्गमित पूँजी ( Issued Capital ):

 अधिकृत पूँजी का वह भाग जो जनता से माँगा जाता है उसे निर्गमित पूँजी कहा जाता है | ये अधिकृत पूँजी के बराबर या उससे कम हो सकता है | कुछ पूँजी निर्गमित कर दी जाती है कुछ भाग कुछ समय बाद के लिए रख लिया जाता है |

प्रार्थित पूँजी (Subscribed Capital) :

निर्गमित पूँजी का वह भाग जो जनता द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है उसे प्रार्थित पूँजी कहा जाता है | अर्थात जनता द्वारा जितने अंशो के लिए आवेदन आता है उसे प्रार्थित पूंजी कहते हैं | यह कभी निर्गमित पूंजी से अधिक और कभी उससे कम होता है |

याचित पूँजी (Called up Capital) :

   प्रार्थित की गयी पूँजी का वह भाग जो कम्पनी द्वारा आवेदक से हिस्सों में मांगी जाती है | इसके लिए कम्पनी द्वारा याचना की जाती जैसे कुछ पूँजी आवेदन पर, कुछ आबंटन पर और शेष सामान्य याचना / याचनाओं पर, अर्थात पूँजी का वह भाग जो कम्पनी द्वारा छोटे – छोटे भागों में माँगा जाता है उसे याचित पूँजी कहते हैं

अयाचित पूँजी (Uncalled Capital) :

 याचित पूँजी का वह भाग जो जनता से अभी तक नही माँगा गया है उसे अयाचित पूँजी कहते है |

चुकता पूँजी (Paid up Capital) :

मांगी गई पूँजी का वह भाग जो अंशधारियों द्वारा भुगतान कर दिया जाता है उसे चुलता पूँजी कहते हैं
परन्तु कभी कभी अंशधारी द्वारा पूर्ण भुगतान नहीं किया जाता है तो उस बची हुई पूँजी की अवशिष्ट याचना ( calls in arrers ) कहा जाता है

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